Thursday, 3 March 2016

“काका माला वचावा” बाजीराव के शनिवार वाडा में गूंजते इतिहास के ये तीन शब्द !

“बाजीराव ने मस्तानी से मोहब्बत की है अय्याशी नहीं ” ये डायलॉग उतना ही सुपरहिट है जितना बाजीराव का मस्तानी के प्रति प्रेम पर कितने लोग है जो इसके आगे की कहानी जानते है बाजीराव और मस्तानी की प्रेम कहानी के आगे एक और स्क्रिप्ट लिखी गयी जो बदले की भावना और सत्ता के लालच से भरी हुई है जिसने इतिहास का रुख ही बदल दिया जो शनिवार वाडा कभी बाजीराव और काशीबाई के प्रेम की दास्ताँ कहता था आज वहां अमावस्या की रात को किसी के कराहने की आवाज़े आती है l 



बाजीराव-मस्तानी


हाल ही में रिलीज हुई फिल्म बाजीराव-मस्तानी को दर्शकों ने खूब सराहा, फिल्म के किरदारों को तो पसंद किया ही गया लेकिन साथ ही साथ मराठा साम्राज्य को बुलंदियों पर ले जाने वाले बाजीराव-मस्तानी की प्रेम कहानी भी दर्शकों को छू गई। फिल्म के अंत में आप सब ने देखा होगा की किस तरह से काशी बायीं के बेटे नाना साहेब ने मस्तानी को कैद कर दिया और अंत आप सबके सामने है l अब कहानी शुरू होती है बाजीराव के वंशजो की !

शनिवारवाडा




वर्ष 1746 ईसवी में बाजीराव ने अपने महल शनिवारवाडा का निर्माण करवाया था। बाजीराव की मृत्यु के पश्चात शनिवाडा में अधिकार को लेकर लड़ाई-झगड़े शुरू हो गए थे।
शनिवार वाडा फोर्ट, महाराष्ट्र के पुणे में स्तिथ है। इस किले की नीव शनिवार के दिन रखी गई थी इसलिए इसका नाम शनिवार वाडा पड़ा। यह फोर्ट अपनी भव्यता और ऐतिहासिकता के लिए प्रसिद्ध है।  शनिवार वाडा फोर्ट का निर्माण राजस्थान के ठेकेदारो ने किया था जिन्हे की काम पूर्ण होने के बाद पेशवा ने नाईक की उपाधि से नवाज़ा था।



इस किले में लगी टीक की लकड़ी जुन्नार के  जंगलो से, पत्थर चिंचवाड़ की खदानों से तथा चुना जेजुरी की खदानों से लाया गया था। इस महल में 27 फ़रवरी 1828 को अज्ञात कारणों से भयंकर आग लगी थी।  आग को पूरी तरह बुझाने में सात दिन लग गए थे। इस से किले परिसर में बनी कई इमारते पूरी तरह नष्ट हो गई थी। उनके अब केवल अवशेष बचे है।  अब यदि हम इस किले की संरचना की बात करे तो किले में प्रवेश करने के लिए पांच दरवाज़े है।  यह किला 1818 तक पेशवाओं की प्रमुख गद्दी रहा था,जुन 1818 में पेशवा बाजीराव द्वितीय ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के सर जॉन मैलकम को यह गद्दी सौप दी और इस तरह पेशवाओ की शान रहे इस किले पर अंग्रेजो का अधिकार हो गया।   लेकिन इस किले के साथ एक काला अध्याय भी जुड़ा है। 

नारायण राव, नानासाहेब पेशवा के सबसे छोटे पुत्र थे। अपने दोनों भाइयों की मृत्यु के पश्चात नारायण राव को पेशवा बना तो दिया गया लेकिन उम्र काफी कम होने की वजह से सत्ता का संचालन रघुनाथ राव और उनकी पत्नी आनंदी को ही सौंपा गया।

 

पेशवा नाना साहेब के तीन पुत्र थे विशव राव, महादेव राव और नारायण राव।  सबसे बड़े पुत्र विशव राव पानीपत की तीसरी लड़ाई में मारे गए थे। नाना साहेब की मृत्यु के उपरान्त महादेव राव को गद्दी पर बैठाया गया। पानीपत की तीसरी  लड़ाई में महादेव राव पर ही रणनीति बनाने की पूरी जिम्मेदारी थी लेकिन उनकी बनाई हुई कुछ रणनीतियां बुरी तरह विफल रही थी फलस्वरूप इस युद्ध में मराठों की बुरी तरह हार हुई थी।  कहते है की इस युद्ध में मराठो के 70000 सैनिक मारे गए थे।  महादेव राव युद्ध में अपनी भाई की मृत्यु और मराठो की हार के लिए खुद को जिम्मेदार मानते थे।  जिसके कारण वो बहुत ज्यादा तनाव में रहते थे और इसी कारण गद्दी पर बैठने के कुछ दिनों बाद ही उनकी बिमारी से मृत्यु हो गई।
उनकी मृत्यु के पश्चात मात्र 16 साल की उम्र में नारायण राव पेशवा बने।

नारायण राव को पेशवा बनाने से काका (चाचा) राघोबा और काकी (चाची) अनादीबाई खुश नहीं थे।



 रघुनाथ राव यानि राघोबा और उनकी पत्नी के भीतर सत्ता का लालच हिलोरे मार रहा था, वे साम्राज्य की देखभाल नहीं उसे हथियाने के सपने देख रहे थे। दोनों कुछ भी करके नारायण राव को अपने रास्ते से हटाना चाहते थे। नारायण राव को पेशवा बनाने से काका (चाचा) राघोबा और काकी (चाची) अनादीबाई खुश नहीं थे। वो खुद पेशवा बनना चाहते थे उनको एक बालक का पेशवा बनना पसंद नहीं आ रहा था। दूसरी तरफ नारायण राव भी अपने काका को ख़ास पसंद नहीं करते थे क्योकि उन्हें लगता था की उनके काका ने एक बार उनके बड़े भाई महादेव राव की ह्त्या का प्रयास किया था।  इस तरह दोनों एक दूसरे को शक की नज़र से देखते थे।  हालात तब और भी विकट हो गए जब दोनों के सलाहकारों ने दोनों को एक दूसरे के विरुद्ध भड़काया। इसका परिणाम यह हुआ की नारायण राव ने अपने काका को घर में ही नज़रबंद करवा दिया।

सुमेर गर्दी: ‘नारायण राव ला धारा’

 
 
रघुनाथ राव और उनकी पत्नी इस बात से बहुत क्रोधित हुए, वे अब देर नहीं कर सकते थे, उन्होंने भील सरदार, सुमेर गर्दी को पत्र लिखकर नारायण राव को गिरफ्तार करने के लिए बुलाया।
उनके साम्राज्य में ही भीलों का एक शिकारी कबीला रहता था जो की गार्दी  कहलाते थे।  वो बहुत ही मारक लड़ाके थे। नारायण राव के साथ उनके सम्बन्ध खराब थे लेकिन राघोबा को वो पसंद करते थे।  इसी का फायदा उठाते हुए राघोबा ने उनके मुखिया सुमेर सिंह गार्दी को एक पत्र भेजा जिसमे उन्होंने लिखा ‘नारायण राव ला धारा’ जिसका मतलब था नारायण राव को बंदी बनाओ।

अनादी बायीं : ‘नारायण राव ला मारा’



लेकिन अनादी बायीं , अपने पति रघुनाथ राव से भी दो कदम आगे थी। उसके पत्र में गिरफ्तारी नहीं बल्कि नारायण राव की हत्या करने का हुक्म जारी कर दिया।
अनादि बाई को यहाँ एक खूबसूरत मौक़ा नज़र आया और उसने पत्र का एक अक्षर बदल दिया और कर दिया ‘नारायण राव ला मारा’  जिसका मतलब था नारायण राव को मार दो।

अच्छा अवसर




 सुमेर सिंह और नारायण राव के संबंध पहले से ही अच्छे नहीं थे, इसलिए सुमेर सिंह को भी बदला लेने का एक अच्छा अवसर मिल गया। पत्र मिलते ही गार्दियों के एक समूह ने रात को घात लगाकर महल पर हमला कर दिया। वो रास्ते की हर बाधा को हटाते हुए नारायण राव के कक्ष की और बढे। जब नारायण राव ने देखा की गार्दी हथियार लेकर खून बहाते हुए उसकी तरफ आ रहे है तो वो अपनी जान बचाने के लिए अपने काका के कक्ष की और “काका माला वचाव” (काका मुझे बचाओ) कहते हुए भागा। 

“काका माला वचावा” बाजीराव के शनिवार वाडा में गूंजते इतिहास के ये तीन शब्द !

“काका माला वचावा”


सुमेर सिंह ने नारायण राव पर जरा भी रहम नहीं बरता, उसने शनिवारवाडा में घुस कर नारायण राव पर आक्रमण कर दिया। नारायण राव अपनी जान बचाने के लिए महल के कोने-कोने में भागे, “काका माला वचावा” चिल्लाते हुए पर अपने चाचा के कक्ष तक पहुँचने से पहले ही वो पकड़ा गया और उसके टुकड़े टुकड़े कर दिए गए। 


इतिहासकारो में मतभेद 


 
मात्र 18 वर्ष की उम्र में नारायण राव, सुमेर सिंह की तलवार की भेंट चढ़ गए। यहाँ पर इतिहासकारो में थोड़ा सा मतभेद है कुछ उस बात का समर्थन करते है की  नारायण राव अपने काका के सामने अपनी जान बचाने की गुहार करता रहा पर उसके काका ने कुछ नहीं किया और गार्दी ने राघोबा की आँखों के सामने उसके टुकड़े टुकड़े कर दिए। लाश के टुकड़ो को बर्तन में भरकर रात को ही महल से बाहर ले जाकर नदी में बहा दिया गया।


महल में आग

 
वर्ष 1818 तक यह महल पेशवाओं के ही हाथ में रहा लेकिन वर्ष 1828 में इस महल में आग लग गई थी जिस कारण एक शनिवारवाडा का एक बड़ा हिस्सा जलकर खाक हो गया था
ये आग कैसे लगी, क्यों लगी, कोई नहीं जानता लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि हर अमावस की रात इस महल से किसी की करहाने की आवाज आती है। कोई मदद के लिए पुकारता है लेकिन कौन….ये कोई नहीं जानता।

नारायण राव की आत्मा


बहुत से लोग कहते हैं कि आज भी इस महल में नारायण राव की आत्मा कैद है, जो मौत का बदला तो नहीं ले पा रही लेकिन मदद की तलाश जरूर कर रही है l कहते है की किले में उसी बच्चे नारायण राव की आत्मा आज भी भटकती है और उसके द्वारा बोले गए आखिरी शब्द “काका माला वचाव” आज भी किले में सुनाई देते है।

पारलौकिक

  
किसी समय में जो महल अपनी कारीगरी, अपनी बनावट और संरचना के लिए जाना जाता था आज वही महल अपने भीतर होने वाली पारलौकिक घटनाओं के चलते देश के भूतहा स्थानों में शुमार हो गया है।

Sunday, 28 February 2016

रेज़ांगला युद्ध-जब आखरी सांस तक चीनी सेना के छक्के छुडाते रहे मेजर शैतान सिंह भाटी



भारत में शायद ही कोई होगा जो 1962 में चीन के साथ हुए युद्ध को याद करना चाहता होl इसकी वजह साफ है, 1962 के युद्ध के जख्म इतने गहरे हैं कि कोई भी उन्हें कुरेदना नहीं चाहताl लेकिन ऐसा नहीं है कि 1962 युद्ध ने सिर्फ हमें घाव ही दिए हैंl उस युद्ध ने हमें ये भी सिखाया है कि विषम परिस्थितियों में भी भारतीय सैनिक बहादुरी से न केवल लड़ना जानते हैं, अपनी जान तक देश की सीमाओं की रक्षा के लिए न्यौछावर नहीं करते हैं, बल्कि दुश्मन के दांत भी खट्टे करना जानते हैंl
1962 युद्ध के दौरान लद्दाख के रेज़ांग-ला में भारत के वीर सैनिकों ने चीनी सैनिकों से जो लड़ाई लड़ी थी उसे ना केवल भारतीय फौज बल्कि चीन के साथ-साथ दुनियाभर की सेनाएं भी एक मिसाल के तौर पर देखती हैं और सीख लेना नहीं भूलती l




चीन का तिब्बत पर हमला, फिर कब्जा और दलाई लामा के भागकर भारत में राजनैतिक शरण लेने के बाद से ही भारत और चीन के रिश्तों में बेहद खटास आ चुकी थीl ऐसे में चीन की लद्दाख में घुसपैठ और कई सीमावर्ती इलाकों में कब्जा करने के बाद भारतीय सेना ने भी इन इलाकों में अपनी फॉरवर्ड-पोस्ट बनानी शुरु कर दी थीl भारत का मानना था कि चीन इन सीमावर्ती इलाकों में अपनी पोस्ट या फिर सड़क बनाकर इसलिए अपना अधिकारी जमा रही थी क्योंकि ये इलाके खाली पड़े रहते थेl सालों-साल से वहां आदमी तो क्या परिंदा भी पर नहीं मारता था, इसी का फायदा उठाया चीन नेl जिसके चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री ने इन ठंडे रेगिस्तान और बंजर पड़े लद्दाख के सीमावर्ती इलाकों में अपनी पोस्ट बनाने की आज्ञा दी—जिसे आस्ट्रैलियाई पत्रकार एन. मैक्सवेल ने अपनी किताब ‘इंडियाज चायना वॉर’ में नेहरु की ‘फॉरवर्ड-पोलिसी’  नाम देकर बदनाम करने की कोशिश की हैl




लद्दाख के चुशुल इलाके में करीब 16,000 फीट की उंचाई पर रेज़ांगला दर्रे के करीब भारतीय सेना ने अपनी एक पोस्ट तैयार की थी जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी कुमाऊं रेजीमेंट की एक कंपनी को जिसका नेतृत्व कर रहे थे मेजर शैतान सिंह भाटी l 123 जवानों की इस कंपनी में अधिकतर हरियाणा के रेवाड़ी इलाके के अहीर (यादव) शामिल थेl चीनी सेना की नजर चुशुल पर लगी हुई थीl वो किसी भी हालत में चुशुल को अपने कब्जे में करना चाहते थे जिसके मद्देनजर चीनी सैनिकों ने भी इस इलाके में डेरा डाल लिया थाl
इसी क्रम में जब अक्टूबर 1962 में लद्दाख से लेकर नेफा (अरुणाचल प्रदेश) तक भारतीय सैनिकों के पांव उखड़ गए थे और चीनी सेना भारत की सीमा में घुस आई थी, तब रेज़ांग-ला में ही एक मात्र ऐसी लड़ाई लड़ी गई थी जहां भारतीय सैनिक चीन के पीएलए पर भारी पड़ी थीl


17 नवम्बर चीनी सेना ने रेज़ांग-ला में तैनात भारतीय सैनिकों पर जबरदस्त हमला बोल दियाl चीनी सैनिकों ने एक प्लान के तहत रेज़ांग-ला में तैनात सैनिकों को दो तरफ से घेर लिया, जिसके चलते भारतीय सैनिक अपने तोपों का इस्तेमाल नहीं कर पाई लेकिन .303 (थ्री-नॉट-थ्री) और ब्रैन-पिस्टल के जरिए भी कुमाऊं रेजीमेंट के ये 123 जवान चीनी सेना की तोप, मोर्टार और ऑटोमैटिक हथियारों जिनमें मशीन-गन भी शामिल थीं, मुकाबला कर रहे थेl इन जवानों ने अपनी बहादुरी से बड़ी तादाद में चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया लेकिन चीनी सेना लगातार अपने सैनिकों की मदद के लिए रि-इनफोर्समेंट भेज रही थीl

 परमवीर चक्र मेजर शैतान सिंह भाटी 
 
मेजर शैतान सिंह खुद कंपनी की पांचों प्लाटून पर पहुंचकर अपने जवानों की हौसला-अफजाई कर रहे थेl इस बीच कुमाऊं कंपनी के लीडर मेजर शैतान सिंह गोलियां लगने से बुरी तरह जख्मी हो गएl दो जवान जब उन्हे उठाकर सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे थे तो चीनी सैनिकों ने उन्हे देख लियाl
शैतान सिंह अपने जवानों की जान किसी भी कीमत पर जोखिम में नहीं डाल सकते थेl उन्होनें खुद को सुरक्षित स्थान पर ले जाना से साफ मना कर दियाl जख्मी हालत में शैतान सिंह अपने जवानों के बीच ही बने रहेl वहीं पर अपनी बंदूक को हाथ में लिए उनकी मौत हो गईl
दो दिनो तक भारतीय सैनिक चीनी पीएलए को रोके रहेl 18 नवम्बर को 123 में से 109 जवान जिनमें कंपनी कमांडर मेजर शैतान सिंह भी शामिल थे देश की रक्षा करते मौत को गले लगा चुके थेl लेकिन इसका नतीजा ये हुआ कि भारतीय सैनिकों की गोलियां तक खत्म हो गईंl बावजूद इसके बचे हुए जवानों ने चीन के सामने घुटने नहीं टेकेंl

भारतीय गुप्तचर एजेंसी रॉ के पूर्व अधिकारी आर के यादव ने अपनी किताब ‘मिशन आर एंड डब्लू’ में रेज़ांगला की लड़ाई का वर्णन करते हुए लिखा है कि इन बचे हुए जवानों में से एक सिंहराम ने बिना किसी हथियार और गोलियों के चीनी सैनिकों को पकड़-पकड़कर मारना शुरु कर दियाl मल्ल-युद्ध में माहिर कुश्तीबाज सिंहराम ने एक-एक चीनी सैनिक को बाल से पकड़ा और पहाड़ी से टकरा-टकराकर मौत के घाट उतार दियाl इस तरह से उसने दस चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार दियाl



गीतकार कवि प्रदीप द्वारा लिखा गया देशप्रेम से ओतप्रोत गाना जिसे लता मंगेशकर ने गाकर अमर कर दिया था दरअसल वो रेज़ागला युद्ध को ध्यान में ही रखकर शायद रचा गया था.
गीत के बोल कुछ यूं हैं, “….थी खून से लथपथ काया, फिर भी बंदूक उठाके दस-दस को एक एक ने मारा, फिर गिर गये होश गंवा के,जब अंत समय आया तो कह गये के अब मरते हैं खुश रहना देश के प्यारों अब हम तो सफर करते हैंl क्या लोग थे वो दीवाने क्या लोग थे वे अभिमानी जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी….”

बताते है कि चीन ने इस लड़ाई में पांच भारतीय जवानों को युद्धबंदी बना लिया था जबकि नौ जवान बुरी तरह घायल हो हुए थेl भारतीय सैनिकों की बहादुरी से हारकर चीनी सैनिकों ने अब पहाड़ से नीचे उतरने का साहस नहीं दिखाया और चीन कभी भी चुशुल में कब्जा नहीं कर पायाl हरियाणा के रेवाड़ी स्थित इन अहीर जवानों की याद में बनाए गए स्मारक पर लिखा है कि चीन के 1700 जवानों को मौत के घाट उतार दिया थाl हालांकि इसमें कितनी सच्चाई है कोई नहीं जानता क्योंकि इन लड़ाईयों में वीरगति को प्राप्त हुए जवानों की वीरगाथा सुनाने वाला कोई नहीं है और चीन कभी भी अपने सेना को हुए नुकसान के बारे में नहीं बतायेगा. लेकिन इतना जरुर है कि चीनी सेना को रेज़ांगला में भारी नुकसान उठाना पड़ाl

वीरगति को प्राप्त हुए मेजर शैतान सिंह को मरणोपरांत देश के सबसे बड़े पदक परमवीर चक्र से नवाजा गया. मेजर शैतान सिंह और उनके वीर अहीर जवानों की याद में चुशुल के करीब रेज़ांगला में एक युद्ध-स्मारक बनवाया गयाl हर साल 18 नवम्बर को इन वीर सिपाहियों को पूरा देश और सेना याद करना नहीं भूलती है क्योंकि “शहीदों की चितांओं पर लगेंगे हर बरस मेले…देश में मर-मिटने वालों का बस यही एक निशां होगा…”
                                                                                                                                         वतन की पुकार 

इस इंडियन ने 15 सौ साल पहले ही खोज लिया था मंगल पर पानी, 15 सौ साल पहले एक भारतीय ने खोजा था मंगल पर पानी, चोरी हुई किताब



खगोलविद् वराहमिहिर।
खगोलविद् वराहमिहिर।
इंदौर।यूएस का वैज्ञानिक संस्थान नासा और भारत का इसरो मंगल ग्रह के बारे में जिन तथ्यों पर रिसर्च कर रहे हैं, उनका उल्लेख तो 1500 साल पहले ही एक भारतीय वैज्ञानिक ने अपनी किताब में कर दिया था। ये खगोलविद् और कोई नहीं वराह मिहिर थे। उनकी इस रिसर्च से वैज्ञानिक अाज भी हैरान हैं। उज्जैन जिले के कपिथा गांव में हुआ था जन्म...
मंगलयान का सांकेतिक फोटो।
मंगलयान का सांकेतिक फोटो।

(28 फरवरी को वर्ल्ड साइंस डे था। इस मौके पर वतन की पुकार  आपको प्रख्यात खगोलविद वराहमिहिर की मंगल पर रिसर्च के कुछ हैरतअंगेज तथ्यों की जानकारी दे रहा है)

कौन थे वराह मिहिर

- वराह मिहिर का जन्म सन् 499 में उज्जैन जिले के कपिथा गांव में हुआ था।
- उनके पिता आदित्यदास सूर्य के उपासक थे।
- वराह मिहिर ने गणित एवं ज्योतिष में व्यापक शोध किया था।
- समय मापक घटयंत्र, इंद्रप्रस्थ में लौह स्तंभ और वेधशाला की स्थापना उन्होंने ही करवाई थी।
- उनका पहला पूर्ण ग्रंथ सूर्य सिद्धांत था, जाे अब उपलब्ध नहीं है।

1500 साल पहले लिखा सूर्य सिद्धांत ग्रंथ।
1500 साल पहले लिखा सूर्य सिद्धांत ग्रंथ।

सूर्य सिद्धांत ग्रन्थ में किया था मंगल की विशेषताओं का उल्लेख

- 1515 साल पहले महान खगोलविद् वराह मिहिर ने सूर्य सिद्धांत नामक ग्रंथ की रचना की थी।
- इस ग्रन्थ में उन्होंने मंगल के अर्धव्यास का उल्लेख किया था जो भारत के मिशन मार्स और नासा की गणना से मिलती जुलती थी।
- नासा ने रोवर सैटेलाइट से 2004 में मंगल के उत्तरी ध्रुव पर उपलब्ध पानी और ठोस रूप में मौजूद लोहे का पता लगाया था।
- पुराणों के आधार पर उस समय वराह मिहिर ने सूर्य सिद्धांत में मंगल पर पानी और लोहे की मौजूदगी का जिक्र किया था।
- आधुनिक मान्यताओं के अनुसार सौरमंडल के सभी ग्रहों की उत्पत्ति सूर्य से ही हुई है।
- वराहमिहिर ने लिखा था सभी ग्रहों की उत्पत्ति सूर्य से हुई है। मंगल सूर्य की संवर्धन किरण से जन्मा है।
वराह मिहिर ज्योतिष के भी प्रख्यात विद्धान थे।
वराह मिहिर ज्योतिष के भी प्रख्यात विद्धान थे।
 

चोरी हो चुका है सूर्य सिद्धांत ग्रंथ

सूर्य सिद्धांत में वराह मिहिर ने वैज्ञानिक आधार पर खगोलीय गणना की है। ये मूल ग्रंथ अब गायब हो चुका है। बाद में अन्य विद्वानों ने सूर्य सिद्धांत को पुन: लिपिबद्ध कर उनकी रिसर्च को आगे बढ़ाया। इसका विश्व की सभी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। नासा के मंगल अभियान के समय वराह मिहिर की गणनाओं का तुलनात्मक अध्ययन खगोलविद् रिटायर्ड आईपीएस अरुण उपाध्याय ने भी किया है। उन्होंने इस पर किताब भी लिखी है। अब वे भी भारत के मंगल अभियान के डाटा का तुलनात्मक अध्ययन कर रहे हैं।

इतिहास के आईने में मंगल

भारतीय खगोलविदों ने मंगल सहित अन्य सौरग्रहों का अध्ययन विस्तारपूर्वक वैज्ञानिक रूप से किया है। इसे सूर्य सिद्धांत, गरुण पुराण, श्रीमदभागवत पुराण, मत्स्य पुराण, अग्नि पुराण में पढ़ा जा सकता है। इसके अलावा वराह मिहिर, भास्कराचार्य तथा आर्यभट्ट की रचनाओं में भी इनका विस्तार से वर्णन है। उक्त सभी सिद्धांत 1500 से दो हजार साल पुराने हैं। भारतीय खगोलविदों की खगोलीय गणना की माप योजन में है, जो आधुनिक 12.75 किमी के बराबर है।

#TheGreatKhaliReturns: विदेशी पहलवानों से खली ने लिया बदला, जीत ली फाइट

 
 
जीत के बाद रिंग में टाइटल बेल्ट के साथ खली ।
 
 
देहरादून (उत्तराखंड).विदेशी रेसलर्स से फाइट में जख्मी हुए खली ने रविवार को 'द ग्रेट खली रिटर्न्स मेगा शो' टाइटल अपने नाम कर लिया। उन्होंने दो मिनट में कनाडा के पहलवानों को हरा दिया। बता दें कि इस फाइट से पहले विशेष पूजा में उन्होंने कहा था, "28 फरवरी को विदेशी रेसलर को पीटकर बदला लूंगा। मैं सिर के बदले सिर फोड़ूंगा और खून के बदले खून निकालूंगा।" कहां हुआ मैच और फाइट के लिए खली ने कैसे की थी तैयारी...
  

खली ने दो मिनट में रेसलर्स को हरा दिया।
खली ने दो मिनट में रेसलर्स को हरा दिया

- ग्रेट खली शो का महामुकाबला बेहद ही रोमांचक हुआ। खली ने ब्रॉडी स्टील, मैक्स और अपोलो की सारी हेकड़ी दो मिनट में ही निकाल दी।
- उन्होंने तीनों को पीट-पीटकर चित कर दिया। खली ने तीनों को कुर्सी से भी जमकर पीटा।
- बॉलीवुड एक्टर श्रेयस तलपड़े ने ट्विटर पर फाइट की फोटोज शेयर करते हुए लिखा, "कई ड्रामेटिक ट्विस्ट और टर्न्स के बाद आखिर अंत में हीरो की जीत हुई।"
- फाइट उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुआ। इससे पहले जख्मी हो जाने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें फाइट नहीं करने की सलाह दी थी।
- पर उन्होंने हर हाल में फाइट का फैसला किया। फाइट से पहले उन्होंने विशेष पूजा भी की थी।
- आईसीयू से बाहर आने के बाद खली ने 35 अंडे, पांच किलो फल, 6 गिलास जूस और 7 बर्गर का नाश्ता किया था।
 
खली ने विदेशी पहलवानों को जमकर पीटा।
खली ने विदेशी पहलवानों को जमकर पीटा।
 
फाइट में तीन पहलवानों ने मिलकर पीटा था खाली को
 
- खली के स्पोक्सपर्सन अमित स्वामी ने  बताया था कि, " फाइट में घायल हुए खली के माथे पर सात टांके लगे हैं।
- बता दें कि बुधवार देर रात हल्द्वानी में फाइट के दौरान ब्रूडी स्टील और दो दूसरे रेसलर्स ने उन्हें स्टील चेयर से पीटकर जख्मी कर दिया था।
- बुधवार से खली आईसीयू में थे। डॉक्टरों ने खली की हालत गंभीर बताई थी। उनके कंधे में फ्रैक्चर था।
- सिर, गर्दन, छाती और रीढ़ की हड्डी में भी चोट बताई थी।
- गुरुवार सुबह देहरादून लाए जाने के बाद वे खुद चलकर एम्बुलेंस में बैठे और 6 घंटे में ठीक भी हो गए।
- डॉक्टरों के मुताबिक, खली की सिटी स्कैन और एमआरआई रिपोर्ट नॉर्मल आई है। अभी उन्हें कुछ दिन आराम करना होगा।
 
28 फरवरी के मैच से पहली की थी विशेष पूजा।
28 फरवरी के मैच से पहली की थी विशेष पूजा।
 
ठीक होते ही खली ने रेसलर्स को दी थी चुनौती
 
खली ने कहा था कि वे रिंग में विदेशी रेसलर्स को ढेर कर देंगे। उन्होंने 28 फरवरी को ब्रूडी स्टील से फाइट का एलान भी कर दिया है।
 
 
फाइट के दौरान क्या हुआ था?
 
- दरअसल, ‘द ग्रेट खली रिटर्न्स’ शो में खली पर कई विदेशी रेसलर्स भारी पड़ गए।
- रेसलर अपोलो और भारत के जिंदर महल के बीच फाइट में जिंदर जीत गए। जब वे रिंग में जीत का जश्न मना रहे थे, तभी विदेशी रेसलर माइक नॉक्स और ब्रूडी स्टील रिंग में आ गए।
- उन्होंने जिंदर को पीटा और खली को भी फाइट के लिए उकसाया। खली भी पीछे नहीं रहे और रिंग में कूद पड़े।
- रिंग में आते ही उन्होंने तीनों विदेशी रेसलर्स को पीटना शुरू कर दिया। इस पर रेफरी ने उन्हें एलिमिनेट कर दिया।
- जब खली इसका विरोध करते हुए रेफरी से बात कर रहे थे, तभी विदेशी रेसलर्स ने उन पर जोरदार लात-घूंसे बरसाए और एक ने स्टील चेयर से वार कर दिया।
- घायल होने के बाद भी तीनों रेसलर उनको मारते रहे। इस पर खली की एकेडमी के रेसलर्स ने उन्हें बचाया।
- बता दें कि इवेंट से पहले ब्रूडी स्टील ने WWE रेसलर रहे खली को उनसे फाइट करने की चुनौती दी थी।
- दोनों ही खिलाड़ियों ने इस फाइट के लिए डेथ वारंट पर साइन किए थे।
 
 
फैन्स ने किया हंगामा
 
- शुरू से ही खली ब्रूडी स्टील और बाकी रेसलर्स पर भारी पड़ रहे थे। उनके घायल होने के बाद रेफरी ने मैच कैंसल कर दिया गया था।
- खली की ऐसी हालत देख दर्शकों ने वहां जबरदस्त हंगामा किया और विदेशी रेसलर्स पर मिट्टी फेंकी।
 
 
क्या कहा थाब्रूडी स्टील ने?
 
- उन्होंने कहा था, "मैं खली को चुनौती देता हूं कि वे मुझसे मुकाबला करके दिखाएं।"
- "यदि वे ऐसा नहीं कर सकते तो रिंग के बाहर बैठकर आराम करें।"
- ब्रूडी कनाडा के 10 बार के हेवीवेट चैम्पियन हैं।
- पुएतरे रिको, ऑस्ट्रिया और जापान के भी हेवीवेट चैम्पियन रह चुके हैं।
- ब्रूडी अपने 1200 में से 1170 मुकाबले जीत चुके हैं।
- उनकी लंबाई 6 फीट 7 इंच है। उनका वजन 315 पाउंड है।
 

Friday, 26 February 2016

लो जी आ गयी पानी से चलने वाली मोटरसाइकिल 1 लीटर पानी में जाएगी 500 किलोमीटर

इस समय डीजल की बढती कीमत से हर आदमी परेशान है तो अब खुस हो जाईये जी हाँ  ब्राजील के साओ पोआलो ने ये काम कर दिखाया है
साओ पोआलो में रहने वाले इस आदमी ने ऐसी बाइक बना दी है जो पानी से चलती है और इसका माइलेज भी बहुत अधिक है
रिकार्डो अजवेड़ोईस ने अपनी इस बाइक का नाम टी पॉवर एच्2ओ रखा है


water-bike-5637117f745b3_l 


रिकार्डो की बनायीं हुई ये बाइक 1 लीटर  पानी में 500 किलोमीटर तक जा सकती है


water-bike-563711984b304_l


इस बाइक में एक बेटरी लगी हुई है और इस बाइक का एक विडियो भी youtube पर अपलोड किया गया है


water-bike-563711b217671_l (1)


इस बाइक में इंधन में हाइड्रोजन पर्योग किया जाता है बाइक में पानी डालने पर यह बैटरी की मदद से हाइड्रोजन बनाती है | रिकार्डो की ये बाइक टेस्टिंग के लिए बिलकुल तैयार हो गयी है और अगर ये बाइक सफल हुई तो ये एक बहुत बड़ी क्रांति ला सकती है |

उत्तराखंड: फाइट में बुरी तरह घायल खली ICU में भर्ती, सिर पर लगी गहरी चोट

     ट्रीटमेंट के दौरान खली।
हल्द्वानी (उत्तराखंड).‘द ग्रेट खली’ रेसलिंग इवेंट में इंडियन रेसलर खली बुरी तरह घायल हो गए। बुधवार रात उन्हें हल्द्वानी के हॉस्पिटल में आईसीयू में रखा गया था। यहां से गुरुवार सुबह हेलिकॉप्टर से उन्हें देहरादून लाया गया।  
कंधे में फ्रैक्चर, सिर पर गहरी चोट...
- खली का ट्रीटमेंट कर रहे डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें छाती, गर्दन और दिमाग में गंभीर चोटें आई हैं।
- उनके सिर में गहरी चोट है, जिससे काफी खून बह गया है। रीढ़ की हड्डी में भी दर्द हो रहा है।
- उनके कंधे में भी फ्रैक्चर हुआ है। 24 घंटे तक उन्हें वॉच किया जाएगा।
- फाइट में कनाडा की महिला रेसलर के हाथ में भी फ्रैक्चर हुआ है।
फाइट के दौरान क्या हुआ?
- दरअसल, ‘द ग्रेट खली रिटर्न्स’ शो में खली पर कई विदेशी रेसलर्स भारी पड़ गए।
- रेसलर अपोलो और भारत के जिंदर महल के बीच फाइट में जिंदर जीत गए। जब वे रिंग में जीत का जश्न मना रहे थे तभी विदेशी रेसलर माइक नॉक्स और ब्रूडी स्टील रिंग में आ गए।
- उन्होंने जिंदर को पीटा और खली को भी फाइट के लिए उकसाया। खली भी पीछे नहीं रहे और रिंग में कूद पड़े।
- रिंग में आते ही उन्होंने तीनों विदेशी रेसलर्स को पीटना शुरू कर दिया। इस पर रेफरी ने उन्हें एलिमिनेट कर दिया।
- जब खली इसका विरोध करते हुए रेफरी से बात कर रहे थे तभी विदेशी रेसलर्स ने उनपर जोरदार लात-घूंसे बरसाए और एक ने स्टील चेयर से वार कर दिया।
- घायल होने के बाद भी तीनों रेसलर्स उनको मारते रहे। इस पर खली की एकेडमी के रेसलर्स ने उन्हें बचाया।
- बता दें कि इवेंट से पहले ब्रूडी स्टील ने WWE रेसलर रहे खली को उनसे फाइट करने की चुनौती दी थी।
- दोनों ही खिलाड़ियों ने इस फाइट के लिए डेथ वारंट पर साइन किए थे।
फैन्स ने किया हंगामा
- शुरू से ही खली ब्रूडी स्टील और बाकी रेसलर्स पर भारी पड़ रहे थे। उनके घायल होने के बाद रेफरी ने मैच रद्द कर दिया।
- खली की ऐसी हालत देख दर्शकों ने वहां जबरदस्त हंगामा किया और विदेशी रेसलर्स पर मिट्टी फेंकी।
क्या कहा थाब्रूडी स्टील ने?
- उन्होंने कहा था, "मैं खली को चुनौती देता हूं कि वे मुझसे मुकाबला करके दिखाएं।"
- "यदि वे ऐसा नहीं कर सकते तो रिंग के बाहर बैठकर आराम करें।"
- ब्रूडी कनाडा के 10 बार के हैवीवेट चैम्पियन हैं।
- पुएतरे रिको, ऑस्ट्रिया और जापान के भी हैवीवेट चैम्पियन रह चुके हैं।
- ब्रूडी अपने 1200 में से 1170 मुकाबले जीत चुके हैं।
- उनकी लंबाई 6 फीट 7 इंच है। उनका वजन 315 पाउंड है।
    रिंग में फाइट के दौरान खली।
    रिंग में खली को पकड़े विदेशी रेसलर्स।
     एक रेसलर ने खली पर स्टील चेयर से वार किया।


खली के सिर में गहरी चोट लगी।


     चोट लगने के बाद रिंग से बाहर गिर गए थे खली।



    घटना के बाद पहले खली को ग्रीन रुम ले जाया गया और फिर वहां से हॉस्पिटल।

     ट्रीटमेंट के दौरान खली।

Ringing Bells पर दर्ज होगा फ्रॉड केस, BPO को नहीं दिए पैसे


Freedom 251 स्मार्टफोन लॉन्च करने वाली कंपनी रिंगिंग बेल्स को लेकर कंट्रोवर्सीज खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। BPO कंपनी Cyfuture के फाउंडर अनुज बैराठी ने कंपनी पर काम का पैसा न देने का आरोप लगाया है। वे जल्दी ही कंपनी पर केस भी दर्ज करने जा रहे हैं। हालांकि रिंगिंग बेल्स इन आरोपों का खंडन कर रही है।
 
 
क्या है मामला...

- रिंगिंग बेल्स ने Cyfuture से BPO सर्विसेज आउटसोर्स की थी।
 
- Freedom 251 लॉन्च के पहले और बाद के कुछ दिन काम करवाने के बाद Cyfuture ठीक से काम नहीं कर रही हैं ऐसा कहकर काम बंद करवा दिया।
 
- कंपनी को उसके काम का पैसा भी नहीं दिया गया।
 
- रिंगिंग वेल्स ने Cyfuture पर कॉल अटैंड न करने और कस्टमर्स से अच्छी तरह व्यवहार न करने का आरोप लगाया।
 
रिंगिंग बेल्स के डायरेक्टर मोहित गोयल वाइफ के साथ। बैराठी इन्हीं की कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज करेंगे।
 
हमें तो शुरू से डाउट था : बैराठी
 
Cyfuture कंपनी के फाउंडर अनुज बैराठी ने बताया कि मेरी कंपनी शुरू से ही रिंगिंग बेल्स और इसके बिजनेस मॉडल को लेकर डाउट में थी, लेकिन जब हमें सीनियर पॉलिटीशियन के लॉन्चिंग इवेंट में आने की जानकारी दी गई तब हमने इस प्रोजेक्ट लेने के लिए हां कर दी। फोन लॉन्च होने के पहले और बाद के दिनों में हमारे कॉल सेंटर ने एक दिन में लाखों फोन अटैंड किए। हमारी 100 लोगों की टीम ने पूरी मेहनत से काम किया।
अनुज बैराठी ने कहा कि रिंगिंग बेल्स भी हमारी सर्विस से खुश थी। लेकिन जब पैसे देने की बारी आई तो अब वह पल्ला झाड़ रही है। यह सीधे-सीधे धोखाधड़ी का मामला है। कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर कंपनी ने हमें एक साल के लिए हायर किया था। अब वह हमें इसके पहले टर्मिनेट नहीं कर सकती। बैराठी ने कहा कि हमने इसके खिलाफ केस दर्ज करने की तैयारी कर ली है।